सांभ हमारे रहन- सहन की

चम्बा जनपदीय क्षेत्र का बेहद खूबसूरत गावं कवारसी
आज भी हमारी परम्परागत पहाड़ी वास्तुकला का जीवंत उदहारण है
कवारसी गावं में आज भी परम्परागत ढंग से स्थानीय प्राकृतिक संसाधनो से घरों का निर्माण होता है जिस कारण ये गावं बेहद ही खूबसूरत नज़र आता है।
वक़्त के साथ- साथ जैसे जैसे सहूलते बढ़ती गयी हैं हम आरामप्रस्थ हुए हैं और हमने बढ़ते सड़कों के विस्तार के कारण कंक्रीट आधारित बाहरी भवन निर्माण शैली को अपनाया है जो कि किसी भी रूप में हमारी प्रकृति , पर्यावरण और हमारे स्वस्थ के लिए हितकारी नहीं है , हमने सड़कों के निर्माण के लिए सीमेंट उद्योगों , बिजली प्रोजेक्टों के निर्माण के लिए जितने जंगल काटे हैं उन जंगलों का दस प्रतिशत भी हमने पेड़ नहीं लगाये हैं।

लेकिन ऐसे गावों में जहाँ लोग अपने रहन सहन के लिए पूरी तरह प्राकृतिक संसाधनो पर निर्भर हैं ये लोग आज भी प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखे हुए हैं , इस तरह के घरों में अगर आप जाएँ तो आपको किसी कृत्रिम रूम फ्रेश्नर की जरूरत नहीं होती इन घरों में इस्तेमाल की गयी लकड़ी की सुगंध ही आपका मन मोह लेती है , यहाँ के बाशिंदों को अर्थराइटस , श्वास , आदि जैसी बीमारियां नहीं होती , इन घरों में रहने वाले पंखे – हीटर आदि इस्तेमाल नहीं करते। इन गावों में सब्जी उत्पादन और फसल उत्पादन में पेस्टीसाइड्स , यूरिया आदि का इस्तेमाल नहीं होता यहाँ चूल्हे की राख और भेड़- बकरियों की मेंगनियो की खाद इस्तेमाल होती है , यहाँ पैकेट वाला दूध नहीं बल्कि जंगली जड़ी बूटियों खाने वाले मवेशियों का दूध मिलता है , जबकि हम आज शहरों में कंक्रीट के घरों में रहने वाले लोग सब सुविधाओं से लैस होने के बावजूद भी समस्त बीमारियों से ग्रस्त हैं।

आदमी की सोच है कि दूर के ढोल सुहावने सो जब हम जाते हैं इन गावों में तो यहाँ के बाशिंदे जब हमें देखते हैं तो सोचते हैं कि हम कितने पड़े लिखे हैं और हम कितने सुखी हैं हमारे पास जब वो लोग नए नए गैजेट्स देखते हैं तो सोचते हैं कि वो कितने पिछड़े हुए लोग हैं , हमारी खोखली सुविधाएं उनको आकषिर्त करती हैं

लेकिन असलियत हम जानते हैं कि वास्तव में कौन स्वस्थ है कौन सुखी है और अगर आने वाले वक़्त में वहां के बाशिंदे हमारे नक्श-ए-कदम पर चले तो शायद वो भी जान जाएंगे कि असली सुख परम्परागत रहन सहन में था की कृत्रिम रहन सहन में है !

Comments

comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: विषयवस्तु रक्षित है !!