सांभ आखिर है क्या ?

सांभ आखिर है क्या ? इसकी क्या जरूरत है आज के समाज में ?
इन सभी को समझाते डॉ गौतम व्यथित जी |

जैसे जैसे वक़्त बदल रहा है हमारे जीने में हमारे रहन -सहन में हमारी बात चीत में भी परिवर्तन आ रहा है जिसको देखते हुए एक प्रश्न हमारे ज़हन में आता है की वक़्त रहते अगर हमने अपनी इस विरासत को नहीं संभाल सके तो आने वाली पीढियां हमारी समृद्ध एवं संपन्न सांस्कृतिक विरासत से वंचित रह जाएंगी सांभ एक सामूहिक प्रयास है अपनी लोक संस्कृति , परम्पराओं को आने वाली पीढ़ियों के लिए सहेज कर रखने का , हमारा रहन -सहन हमारी वेश भूषा को सब कुछ स्थानीय संसांधनो पर निर्भर रहा है और अगर देखा जाए तो रोजमर्रा की ज़िन्दगी में काम आने वाली समस्त वस्तुएं हमारे बुजर्गों ने स्थानीय प्राकृतिक संसाधनो से वैज्ञानिक तरीके इज़ाद की होती थी

लेकिन आज आधुनकिता की आपधापी में सब पीछे छूट रहा है ऐसे में वो दिन दूर नहीं जब हमें भी अपने ग्रामीण परिवेश को कृत्रिम वातावरण में तैयार करके आने वाली पीढ़ियों को दिखाना पड़ेगा और ये कहना पड़ेगा की असल तो हम संभाल नहीं पाए …ना पहाड़ , ना नदियां , ना भाषा ……ना …

Comments

comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: विषयवस्तु रक्षित है !!