टांकरी फाँट – सांभ हमारी लिपि की

कभी एक दौर था जब पहाड़ी रियासतों में पढ़ने- लिखने का काम टांकरी में किया जाता था
कुल्लू से लेकर रावलपिंडी तक टांकरी लिपि में समस्त भाषाओँ को लिखा जाता था जिसका सबूत आज भी मंदिरो की घंटियों या हमारे पुराने बर्तनो पर टांकरी में अंकित शब्दों से मिल जाता है
अगर हम अपने पुराने राजस्व रिकार्ड देखें तो उनको भी टांकरी में ही लिखा गया था

लेकिन आज की तारीख में हमारी इस लिपि का सबसे दुखद पहलू यह है की ज्यादातर लोगों को इतना भी पता नहीं है की हमारी भी एक लिपि थी , सहेज कर रखने की बात तो बाद में आती है

कभी लाखों लोगों की रोजमर्रा ज़िन्दगी का हिस्सा रही टांकरी को आज समूचे हिमाचल में पढ़ने वाले बामुश्किल दस- पंद्रह लोग बचे होंगे जिनमे से राजगुरु की उपाधि से नवाज़े जा चुके कवि/ लेखक/नाटककार / संस्कृति एवं पर्यावरण सरंक्षक रैत निवासी श्री हरिकृष्ण मुरारी जी से सांभ कार्यक्रम के तहत मुलाक़ात हुई और इस मुलाक़ात के दौरान मुरारी जी के मार्गदर्शन में इस लिपि को सहेज कर रखने की बात हुई जिसको की हम वर्कशॉप /सेमीनार / ऑनलाइन टांकरी वर्णमाला एवं विभिन्न माध्यमो से क्रियान्वित करने जा रहे हैं
लगभग दो वर्ष के अनुसंधान और पुराने शिलालेखों ,पुरानी खातबाहियों , राजस्व रिकार्डों , संग्रहलयों से जुटाए पुराने पत्रों के संदर्भों से ये फाँट तैयार किया गया है अभी निकट भविष्य में हम इस फाँट को लोगों के लिए और उपयोगी एवं आसानी से प्रयोग में लाने योग्य बनाने के कार्य में प्रयासरत हैं ताकि कोई भी इस लिपि को आसानी से सीख सके . क्यूंकि अभी तक इस लिपि को हाथ से ही लिखा जाता रहा है तो इस कारण इसकी वर्णमाला अलग -अलग कागजों एवं शिलालेखों पर अलग -अलग हस्तलेखन होने की बजह से लिखने वाले के अनुरूप रही है जैसा कि हस्तलेखन शैली सबकी अलग -अलग रहती है सो इसकी वर्ण माला के शब्द भी इस से अछूते नहीं रहे लेकिन इस लिपि के प्रचार -प्रसार में नीरसता इसके उत्थान में बहुत बड़ी बाधा रही ,हमने इस लिपि में पहाड़ी भाषा में बोले जाने वाले एक स्वर (” ल ” – जोकि चौल , दाल , गाल , में ल का स्वर देता है ) को जोड़ा है …

चूँकि इस वक़्त फाँट तैयार है सांभ टीम समस्त हिमाचल वासियों को बधाई देती है और बहुत ही जल्द हम इसका ओपन डाउनलोड लिंक समस्त लोगों को उपलब्ध करवा देंगे

चूँकि इसमें अभी भी कुछ कमियां हो सकती हैं सो आप सब के आपेक्षित सहयोग से दूर करने के लिए हम हमेशा प्रयासरत रहेंगे

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