कुंजू पूछे चंचलो

किसी भी क्षेत्र में काम करने वाले लोग उस क्षेत्र के उत्थान और पतन के लिए जिम्मेवार होते हैं .अहम् की अहमियत को ढंग से न समझते हुए कार्यरत लोगों में अहम् का वहम उस क्षेत्र के पतन के लिए पूर्णतया उत्तरदायी रहता है बात अगर हिमाचली गीत संगीत की करी जाए तो …हिमाचल में गिने-चुने गायक कलाकार हैं जिनमें ज्यादातर के अंदर खुद को दूसरे गायक से श्रेष्ठ मानने का वहम हिमाचली संगीत के उत्थान में सबसे बड़ी बाधा है ….ज्यादातर गायक चाहते हैं कि वो अकेले गायें जब वीडियो बने उसमें भी वो ही एक्ट करें …ज्यादातर गायक दूसरे गायकों के साथ नहीं गाना चाहते ,,,सिर्फ खुद को ही सर्वश्रेष्ठ मानने की होड़ है ….जिस कारण ..हिमाचली संगीत में नए – नए प्रयोग नहीं हो पा रहे हैं …वही पुरानी धुनें वही पुराने बोल … गीत कब आया, किसने गाया थोड़े वक़्त बाद श्रोताओं को याद भी नहीं रहता ….
अगर पडोसी प्रदेश पंजाब की बात करें तो वहां हर दिन कई नए गाने आते हैं हाँ श्रोता उन्ही गानों को तवज्जो देते हैं जो वाकई में सुनने योग्य होते हैं …अगर पंजाबी गायकों की बात करें तो बड़े-बड़े नाम किसी नव गायक के साथ गाने में शर्म महसूस नहीं करते हैं …गुरदास मान बुलंदी पर रहते हुए जमीन से जुड़े हैं …
हिमाचली लोक संगीत परिवेश में करनैल राणा का एक अलग मुकाम है , करनैल राणा ने भी श्री लहरू राम सांख्यान के साथ गाने गाये हैं …लमन बैंड में दो गायक साथ मिल के गाते हैं ..लेकिन अब समय है की हिमाचली गायक भी एक दुसरे के साथ मिलके कुछ नया गाकर …कुछ नया प्रस्तुत करें ..
पिछले दिनों इस ही कोशिश में बात चली कि क्यूँ ना कुछ नया लिख के दो या तीन गायकों को इक्कठा करके उनसे गवायाँ जाए …विनोद भावुक ने चंबा के ऊपर एक गीत लिखा करनैल राणा और सुनील राणा को साथ बिठाया गया …एक कोशिश की गयी ….जो आने वाले दिनों में रिकार्डिंग के लिए लगभग तैयार है ….
इस अनुभव के बाद एक अनुभव और हुआ कि बुलंदी पर पहुंचा हर शख्स अहंकारी नहीं है लेकिन सिर्फ उसको अप्रोच कैसे किया जाता है यह बहुत मायने रखता है …
शुक्रिया करनैल भाई शुक्रिया सुनील भाई ……………….

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