डॉ प्रत्यूष गुलेरी

“जियां अहाँ दा शरीर है उस वास्ते खून दी जरूरत है, तियां ही मैं एह समझदा की कुसी संस्कृति जो जिन्दा रखने वास्ते उसदी भाषा बड़ी जरूरी है”

डॉ प्रत्यूष गुलेरी हिमाचल प्रदेश के सहित्यकार हैं, वर्तमान में हिंदी साहित्य अकादमी की सामान्य परिषद्, हिंदी सलहाकार सिमिति और कार्यकारिणी मंडल के सदस्य है| गुलेरी जी ने ना केवल हिंदी साहित्य में कार्य किया बल्कि हिमाचली भाषा में भी इनका योगदान रहा है और कई सारी पहाड़ी रचनायें नेशनल बुक ट्रस्ट, दिल्ली द्वारा प्रकाशित हुई है | इसी कारण उत्तर प्रदेश हिंदी संस्था ने साहित्य क्षेत्र में उत्क्रष्ट प्रदर्शन करने पर सौहार्द सम्मान की घोषणा की है |
डॉ प्रत्यूष गुलेरी जी के साथ हमारी एक खास मुलाकात जिसमे युवाओं के लिए उनका खास सन्देश है |

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